मुख्य बिंदु:
- कर्नाटक सरकार ने नंदिनी दूध की कीमतों में 8 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी करने का बड़ा फैसला लिया है।
- दूध के बढ़े हुए नए दाम राज्य भर में 1 नवंबर से लागू हो जाएंगे, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
- राज्य सरकार और कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) का कहना है कि बढ़ी हुई कीमत का पूरा लाभ सीधे तौर पर पशुपालकों और डेयरी किसानों को दिया जाएगा।
कर्नाटक में आम लोगों को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है, जहां राज्य मंत्रिमंडल ने नंदिनी दूध की कीमतों में 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने की मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि दूध की ये नई दरें 1 नवंबर से पूरे राज्य में लागू हो जाएंगी। पशुपालकों और डेयरी यूनियनों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है।
मिली जानकारी के मुताबिक, कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) और उससे जुड़ी 15 जिला दुग्ध उत्पादक यूनियनों ने चारे की बढ़ती लागत और पशुपालन के खर्चों का हवाला देते हुए दूध के दाम में 10 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, कैबिनेट में विस्तृत चर्चा के बाद आम जनता और किसानों दोनों के हितों में संतुलन बनाते हुए 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी पर अंतिम मुहर लगाई गई।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस फैसले के बाद कर्नाटक में सबसे ज्यादा बिकने वाले नंदिनी टोंड दूध (नीला पैकेट) और होमोजिनाइज्ड दूध के दाम में सीधा उछाल आएगा। सरकार ने साफ किया है कि नंदिनी दूध की कीमतों में की गई इस वृद्धि से मिलने वाली पूरी राशि प्रशासनिक खर्चों में काटे बिना सीधे दुग्ध उत्पादक किसानों के खातों में ट्रांसफर की जाएगी।
नंदिनी दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब कितने में मिलेगा एक लीटर पैकेट?
बता दें कि कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) राज्य में ‘नंदिनी’ ब्रांड के तहत प्रतिदिन करोड़ों लीटर दूध की आपूर्ति करता है। मूल्य वृद्धि के इस नए फैसले के लागू होने से 1 नवंबर से नंदिनी के विभिन्न वेरिएंट्स—जैसे टोंड मिल्क, शुभम (गाय का दूध), समृद्धि (फुल क्रीम) और स्पेशल मिल्क—के लिए ग्राहकों को प्रति लीटर 8 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। इसके साथ ही दही और अन्य दुग्ध उत्पादों की दरों में भी आनुपातिक संशोधन की संभावना जताई गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी KMF ने पैकेट में अतिरिक्त 50 मिलीलीटर दूध जोड़कर कीमतों में 2 रुपये का समायोजन किया था, लेकिन इस बार सीधे तौर पर प्रति लीटर बेस प्राइस में 8 रुपये का इजाफा किया गया है। राज्य के पशुपालन और डेयरी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में हरे और सूखे चारे के दाम में भारी उछाल आया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े लाखों डेयरी किसानों को नुकसान हो रहा था।
कर्नाटक मिल्क फेडरेशन और राज्य सरकार के इस फैसले का आम बजट पर क्या होगा असर?
कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के इस कदम के बाद जहां राज्य के करीब 26 लाख से अधिक डेयरी किसानों को बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं शहरों और कस्बों के मध्यमवर्गीय परिवारों का मासिक रसोई बजट बिगड़ना तय माना जा रहा है। बेंगलुरु सहित राज्य के बड़े शहरों में होटल, कैफे और चाय-कॉफी की दुकानों ने भी दूध महंगा होने के बाद कॉफी और चाय के दाम बढ़ाने के संकेत दिए हैं।
वहीं दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने राज्य सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे आम जनता पर अतिरिक्त बोझ करार दिया है। हालांकि, राज्य सरकार का तर्क है कि पड़ोसी राज्यों जैसे केरल, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र की तुलना में नंदिनी दूध की कीमतों में इस संशोधन के बाद भी कर्नाटक में दूध के दाम अन्य प्रमुख ब्रांडों से किफायती बने हुए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: कर्नाटक में नंदिनी दूध की कीमतों में कितने रुपये की बढ़ोतरी की गई है और यह कब से लागू होगी?
उत्तर: कर्नाटक कैबिनेट ने नंदिनी दूध की कीमतों में 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है और ये नई दरें 1 नवंबर से लागू होंगी।
प्रश्न 2: दूध के दाम बढ़ाने के पीछे कर्नाटक सरकार ने क्या मुख्य कारण बताया है?
उत्तर: सरकार का कहना है कि पशु चारे और डेयरी रखरखाव की बढ़ती लागत से जूझ रहे राज्य के लाखों दुग्ध उत्पादक किसानों को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए यह बढ़ोतरी की गई है।
स्रोत: कर्नाटक कैबिनेट के आधिकारिक निर्णय एवं प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर (BhaaratFeed न्यूज़ डेस्क)