खास बातें (Key Highlights):
- पेट्रोल में एथेनॉल मिलावट को लेकर कर्नाटक सरकार की लैब जांच में 14 में से 11 सैंपल में तय 20% सीमा से अधिक एथेनॉल मिलने का दावा किया गया है।
- लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे ‘E20 बना 420’ और ‘पेट्रोल चोरी’ बताते हुए केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं।
- सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL और HPCL) ने कर्नाटक की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
कर्नाटक के सात जिलों से लिए गए ईंधन के नमूनों में तय मानक से अधिक पेट्रोल में एथेनॉल मिलावट पाए जाने के दावे के बाद देश में एक नया सियासी और उपभोक्ता विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को इस मुद्दे पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को घेरते हुए इसे आम जनता की गाड़ियों से सीधी ‘पेट्रोल चोरी’ करार दिया है। वहीं दूसरी ओर, देश की प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने राज्य सरकार की लैब रिपोर्ट को चुनौती देते हुए कहा है कि पंपों पर बिकने वाला ईंधन पूरी तरह भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के नियमों के अनुरूप है।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कर्नाटक के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिजवान अरशद ने राज्य में की गई एक जांच के नतीजे सार्वजनिक किए। राज्य विभाग ने बेंगलुरु, कोलार, चिक्कबल्लापुरा, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु सहित सात जिलों के अलग-अलग पंपों से पेट्रोल के 14 सैंपल एकत्र किए थे।
इन नमूनों की जांच बेंगलुरु स्थित एनएबीएल (NABL) से मान्यता प्राप्त श्रीराम रिसर्च इंस्टीट्यूट में कराई गई। जांच के नतीजों में दावा किया गया है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलावट की अधिकतम 20 प्रतिशत (E20) की सरकारी सीमा के मुकाबले 14 में से 11 नमूनों में एथेनॉल की मात्रा काफी अधिक पाई गई।
पेट्रोल में एथेनॉल मिलावट पर लैब जांच के आंकड़े और राहुल गांधी का निशाना
राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर लिखा कि ‘E20 अब 420 बन गया है।’ राहुल गांधी पेट्रोल चोरी आरोप लगाते हुए बोले कि जांच रिपोर्ट के अनुसार इंडियन ऑयल (IOCL) के एक सैंपल में 31.2 प्रतिशत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के सैंपल में 30.5 प्रतिशत तक एथेनॉल पाया गया है। उन्होंने दावा किया कि आईओसीएल, एचपीसीएल, बीपीसीएल के साथ-साथ नायरा और शेल जैसी निजी कंपनियों के सैंपल भी तय सीमा से ऊपर निकले, जबकि कंपनियों की अपनी लैब रिपोर्ट में एथेनॉल का प्रतिशत दर्ज ही नहीं किया गया था।
राहुल गांधी ने आम वाहन चालकों की परेशानी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ग्राहक पूरे पैसे महंगे पेट्रोल के चुका रहे हैं, लेकिन उनकी टंकी में तय मात्रा से ज्यादा एथेनॉल भरा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि देश की ज्यादातर गाड़ियां 30 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल झेलने के लिए नहीं बनी हैं, जिससे वाहनों का माइलेज घट रहा है और लोगों को बार-बार मैकेनिक के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती देते हुए पूछा कि तय सीमा से अधिक मिलावट करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई कब होगी।
कर्नाटक पेट्रोल सैंपल रिपोर्ट पर तेल कंपनियों की सफाई और गाड़ियों पर असर
कर्नाटक पेट्रोल सैंपल रिपोर्ट सामने आने के बाद इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने एक संयुक्त बयान जारी कर इन निष्कर्षों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। तेल कंपनियों का कहना है कि कर्नाटक समेत पूरे देश में सप्लाई किया जा रहा E20 पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो के ‘IS 17021’ मानकों का सख्ती से पालन करता है, जिसके तहत एथेनॉल की मात्रा 19 से 21 प्रतिशत के बीच रहती है। कंपनियों ने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने देश के 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 893 सैंपल जांचे हैं, जो पूरी तरह मानकों पर खरे उतरे हैं। साथ ही उन्होंने कर्नाटक सरकार की सैंपलिंग विधि और थर्ड-पार्टी लैब की टेस्टिंग प्रक्रिया को अधूरा बताते हुए स्वतंत्र सत्यापन की मांग की है।
गौरतलब है कि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और गन्ना किसानों की आय बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2013-14 में जहां पेट्रोल में एथेनॉल मिलावट मात्र 1.5 प्रतिशत थी, वहीं 2025-26 तक यह 20 प्रतिशत के लक्ष्य तक पहुंच गई है, जिससे देश को करीब 1.97 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। हालांकि, ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और वाहन मालिकों के बीच यह चर्चा लगातार बनी हुई है कि पुरानी गाड़ियों के इंजन और रबर पार्ट्स पर उच्च एथेनॉल वाले ईंधन का क्या असर पड़ता है और पंपों पर इसकी स्पष्ट लेबलिंग क्यों नहीं की जाती।
पाठकों के प्रमुख सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: पेट्रोल में एथेनॉल मिलावट को लेकर कर्नाटक की लैब रिपोर्ट में क्या दावा किया गया है?
उत्तर: कर्नाटक सरकार द्वारा 7 जिलों से लिए गए 14 पेट्रोल नमूनों की जांच में दावा किया गया है कि 11 सैंपल में तय 20% सीमा से अधिक एथेनॉल मिला है, जिसमें IOCL के सैंपल में 31.2% और HPCL में 30.5% तक एथेनॉल स्तर दर्ज किया गया।
प्रश्न 2: E20 पेट्रोल विवाद पर सरकारी तेल कंपनियों ने क्या जवाब दिया है?
उत्तर: IOCL, BPCL और HPCL ने संयुक्त बयान में राज्य सरकार के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि देशभर में बेचा जा रहा E20 पेट्रोल BIS मानकों (19% से 21% एथेनॉल) के अनुरूप है और कर्नाटक की सैंपलिंग प्रक्रिया में तकनीकी खामियां थीं।
स्रोत: कर्नाटक खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के विभाग, तेल कंपनियों के संयुक्त बयान एवं प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के इनपुट के साथ (BhaaratFeed न्यूज़ डेस्क)