खबर की मुख्य बातें:
- भारत की जीडीपी ग्रोथ चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 7.35% रहने का अनुमान जताया गया है।
- केंद्रीय वित्त मंत्रालय की अक्टूबर 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में मजबूत घरेलू मांग, जीएसटी कलेक्शन और औद्योगिक उत्पादन को इस तेजी का प्रमुख आधार बताया गया है।
- रिपोर्ट में पश्चिम एशिया के तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और खाद्य महंगाई को लेकर सतर्कता बरतने की बात भी कही गई है।
वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की जीडीपी ग्रोथ ने अपनी मजबूत रफ्तार बरकरार रखी है और वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में इसके 7.35 प्रतिशत रहने का अनुमान है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने अपनी अक्टूबर 2026 की ‘मासिक आर्थिक समीक्षा’ (Monthly Economic Review) रिपोर्ट में यह ताजा आकलन साझा किया है। बता दें कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
वित्त मंत्रालय के आर्थिक विभाग द्वारा तैयार किए गए ‘नाउकास्टिंग मॉडल’ (Nowcasting Model) के अनुसार, जुलाई से सितंबर की तिमाही के दौरान देश में उपभोक्ता मांग, औद्योगिक गतिविधियों और निवेश में शानदार मजबूती देखी गई है। यही वजह है कि वित्त मंत्रालय का यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 7.2 प्रतिशत के अनुमान से भी 15 बेसिस पॉइंट अधिक है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दूसरी तिमाही में सकल जीएसटी (GST) कलेक्शन में सालाना आधार पर करीब 15 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई है, जो पहली तिमाही में 8.4 प्रतिशत थी। इसके साथ ही ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में मांग बढ़ने से घरेलू ऑटोमोबाइल बिक्री में भी सालाना आधार पर लगभग 25 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है। वहीं दूसरी ओर, ईंधन की खपत में 7.9 प्रतिशत और बिजली की खपत में 11.1 प्रतिशत की वृद्धि ने साफ संकेत दिया है कि भारत की जीडीपी ग्रोथ को जमीनी स्तर पर ठोस समर्थन मिल रहा है।
भारत की जीडीपी ग्रोथ में औद्योगिक उत्पादन और बुनियादी ढांचे की बड़ी भूमिका
मिली जानकारी के मुताबिक, दूसरी तिमाही के दौरान बंदरगाहों पर कार्गो ट्रैफिक सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़ा है और ई-वे बिल जनरेशन में भी 7 प्रतिशत की तेजी आई है। औद्योगिक मोर्चे पर नजर डालें तो अगस्त 2026 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) 8 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान 9 प्रतिशत रहा। इसके अलावा कैपिटल गुड्स के उत्पादन में 16.9 प्रतिशत और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 11.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो देश में बढ़ते निवेश और खपत को दर्शाती है।
वैश्विक संस्थाओं ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था की इस मजबूती पर भरोसा जताया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अक्टूबर 2026 में पूरे वित्त वर्ष (FY27) के लिए भारत के विकास अनुमान को बढ़ाकर 7.0 प्रतिशत कर दिया है, जबकि विश्व बैंक, ओईसीडी (OECD) और आरबीआई ने इसके 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।
वित्त मंत्रालय की आर्थिक रिपोर्ट के मायने: महंगाई और वैश्विक संकट के बीच क्या हैं चुनौतियां?
वित्त मंत्रालय की आर्थिक रिपोर्ट में जहां विकास की रफ्तार को सराहा गया है, वहीं कुछ प्रमुख वैश्विक और घरेलू जोखिमों के प्रति आगाह भी किया गया है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे माल ढुलाई और उत्पादन लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत और खाद्य महंगाई 7.74 प्रतिशत पर पहुंच गई थी।
हालांकि, भारत का बाहरी आर्थिक मोर्चा काफी मजबूत स्थिति में है। 16 अक्टूबर 2026 तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार 721 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर रहा, जो 10.3 महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है। मंत्रालय का कहना है कि आने वाले महीनों में भारत की जीडीपी ग्रोथ को बनाए रखने के साथ-साथ कीमतों में स्थिरता रखना नीति निर्माताओं की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। सरकार ने प्याज की आपूर्ति और खाद्य तेलों पर शुल्क में राहत जैसे कदमों से आम लोगों को महंगाई से बचाने की कवायद भी तेज कर दी है।
खबर से जुड़े अहम सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ कितनी रहने का अनुमान है?
उत्तर: केंद्रीय वित्त मंत्रालय की अक्टूबर 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई-सितंबर तिमाही (Q2 FY27) में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.35 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
प्रश्न 2: दूसरी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था को किन प्रमुख क्षेत्रों से मजबूती मिली है?
उत्तर: इस तिमाही में जीएसटी कलेक्शन में 15% की वृद्धि, ऑटोमोबाइल बिक्री में 25% का उछाल, बिजली खपत में 11.1% की बढ़ोतरी और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन ने अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा रफ्तार दी है।
स्रोत: केंद्रीय वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट एवं प्रमुख मीडिया इनपुट्स के आधार पर (BhaaratFeed न्यूज़ डेस्क)