खास बातें (Key Highlights):
- आईएनएस कोलकाता रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए भारतीय नौसेना ने समुद्र के बीच हाईजैक किए गए जहाज को समुद्री लुटेरों के कब्जे से मुक्त कराया।
- इस साहसिक अभियान में बंधक बनाए गए 20 ईरानी चालक दल के सदस्यों (क्रू मेंबर्स) को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित बाहर निकाला गया।
- नौसेना के युद्धपोत और मरीन कमांडो (मार्कोस) की सख्त घेराबंदी के बाद हथियारबंद सोमाली लुटेरों को घुटने टेकने पड़े।
अरब सागर और अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती के खिलाफ चलाए गए आईएनएस कोलकाता रेस्क्यू ऑपरेशन में भारतीय नौसेना को एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। नौसेना के जांबाज जवानों ने सोमालिया के समुद्री लुटेरों द्वारा अगवा किए गए एक ईरानी पोत को छुड़ाते हुए उसमें सवार सभी 20 ईरानी नागरिकों की जान बचाई है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की मजबूत समुद्री सुरक्षा क्षमता को साबित कर दिया है।
मिली जानकारी के मुताबिक, समुद्री सुरक्षा गश्त पर तैनात भारतीय युद्धपोत को गहरे समुद्र में एक ईरानी जहाज के हाईजैक होने का आपातकालीन संदेश मिला था। सूचना मिलते ही नौसेना के कमांड सेंटर ने तुरंत सक्रियता दिखाई और युद्धपोत को अपहृत जहाज को ट्रैक कर कार्रवाई करने के लिए रवाना किया गया।
गौरतलब है कि आईएनएस कोलकाता रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जब भारतीय युद्धपोत ने हाईजैक किए गए पोत को घेरा, तो उस पर हथियारबंद सोमाली समुद्री लुटेरे मौजूद थे। लुटेरों ने ईरानी चालक दल के 20 सदस्यों को बंधक बना रखा था और वे इस पोत का इस्तेमाल अन्य व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए ‘मदर शिप’ के तौर पर करने की फिराक में थे।
आईएनएस कोलकाता रेस्क्यू ऑपरेशन: मार्कोस कमांडो की घेराबंदी के आगे झुके लुटेरे
नौसेना के अधिकारियों के अनुसार, युद्धपोत पर तैनात हेलीकॉप्टर और विशेष मरीन कमांडो (MARCOS) की टीम ने बेहद सटीक रणनीति के साथ हाईजैक जहाज को चारों तरफ से घेर लिया। इस पूरे अभियान में सबसे पहली प्राथमिकता बंधक बनाए गए 20 ईरानी क्रू मेंबर्स की जान बचाना था, इसलिए कमांडो दस्ते ने सीधा हमला करने के बजाय मनोवैज्ञानिक दबाव और सामरिक घेराबंदी का सहारा लिया।
लगातार कई घंटों तक चली इस सख्त कार्रवाई और आईएनएस कोलकाता रेस्क्यू ऑपरेशन की आक्रामक तैयारी को देखकर सोमाली समुद्री लुटेरे पस्त हो गए। बच निकलने का कोई रास्ता न देख लुटेरों ने आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद नौसेना की टीम ने जहाज पर चढ़कर तलाशी ली और सभी 20 ईरानी नागरिकों को सुरक्षित मुक्त करा लिया। बचाए गए चालक दल के सदस्यों को भारतीय नौसेना की ओर से प्राथमिक चिकित्सा और जरूरी भोजन-पानी भी उपलब्ध कराया गया।
अरब सागर में भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत और समुद्री सुरक्षा पर असर
पिछले कुछ समय से लाल सागर, अदन की खाड़ी और सोमालिया के तट के आसपास अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर अपहरण व हमलों की घटनाओं में हलचल देखी गई है। ऐसे संवेदनशील माहौल में भारतीय नौसेना हिंद महासागर और अरब सागर में ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ यानी संकट के समय सबसे पहले मदद पहुंचाने वाली ताकत के रूप में उभरी है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से यह समुद्री रूट भारत समेत पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम है, क्योंकि इसी रास्ते से कच्चे तेल और मालवाहक जहाजों की बड़ी आवाजाही होती है। आईएनएस कोलकाता रेस्क्यू ऑपरेशन की इस सफलता से न केवल सोमाली समुद्री लुटेरों के नेटवर्क को तगड़ा झटका लगा है, बल्कि इस क्षेत्र से गुजरने वाले विदेशी नाविकों का भरोसा भी भारतीय सुरक्षा बलों पर और मजबूत हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: आईएनएस कोलकाता रेस्क्यू ऑपरेशन में कितने विदेशी नागरिकों को बचाया गया है?
उत्तर: आईएनएस कोलकाता रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत भारतीय नौसेना ने सोमाली समुद्री लुटेरों के चंगुल से हाईजैक किए गए जहाज को छुड़ाकर 20 ईरानी क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचाया है।
प्रश्न 2: भारतीय नौसेना ने समुद्री लुटेरों के खिलाफ यह कार्रवाई किस क्षेत्र में की?
उत्तर: भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस कोलकाता और मार्कोस कमांडो ने अरब सागर और सोमालिया के समुद्री तट के पास एंटी-पायरेसी अभियान के दौरान इस कार्रवाई को अंजाम दिया।
स्रोत: भारतीय नौसेना के आधिकारिक बयान एवं रक्षा संवाददाता रिपोर्ट्स के इनपुट के साथ (BhaaratFeed न्यूज़ डेस्क)