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DRDO स्वदेशी सेमीकंडक्टर तकनीक: भारत मंडपम में दिखी रक्षा चिप्स की नई ताकत

मुख्य बिंदु:

  • नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ESTIC 2026 कॉन्क्लेव में DRDO स्वदेशी सेमीकंडक्टर तकनीक और अगली पीढ़ी के रक्षा माइक्रोचिप्स का भव्य प्रदर्शन किया गया।
  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के वैज्ञानिकों ने रडार, मिसाइल गाइडेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के लिए बने गैलियम नाइट्राइड (GaN) और सिलिकॉन कार्बाइड चिप्स पेश किए।
  • इस कदम से भारतीय सशस्त्र बलों की विदेशी चिप्स पर निर्भरता खत्म होगी और रक्षा उपकरणों की साइबर सुरक्षा पूरी तरह अभेद्य बनेगी।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे ‘इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव’ (ESTIC 2026) में DRDO स्वदेशी सेमीकंडक्टर तकनीक ने दुनिया भर के रक्षा और टेक विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने इस राष्ट्रीय मंच पर पूरी तरह से भारत में डिजाइन और विकसित किए गए अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर चिप्स, मोनोलिथिक माइक्रोवेव इंटीग्रेटेड सर्किट (MMIC) और हाई-पावर सेंसर का प्रदर्शन किया है। यह उपलब्धि रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर मानी जा रही है।

मिली जानकारी के मुताबिक, रक्षा उपकरणों और फाइटर जेट्स में इस्तेमाल होने वाले चिप्स आम स्मार्टफोन या कंप्यूटर के प्रोसेसर से काफी अलग होते हैं। इन्हें अत्यधिक तापमान, भारी रेडिएशन और दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक हमलों के बीच भी बिना रुके काम करने के लिए विशेष रूप से तैयार किया जाता है।

प्रदर्शनी के दौरान अधिकारियों ने बताया कि DRDO स्वदेशी सेमीकंडक्टर तकनीक के तहत गैलियम नाइट्राइड (GaN) और सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) पर आधारित कंपाउंड सेमीकंडक्टर वेफर्स तैयार किए गए हैं। ये स्वदेशी चिप्स भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस, लंबी दूरी के रडार सिस्टम और अगली पीढ़ी की मिसाइलों की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाने में सक्षम हैं।

DRDO स्वदेशी सेमीकंडक्टर तकनीक और भारत मंडपम ESTIC 2026 में क्या रहा खास?

गौरतलब है कि भारत मंडपम ESTIC 2026 के विशेष पवेलियन में डीआरडीओ की प्रमुख प्रयोगशालाओं, जैसे सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL) और सेमीकंडक्टर कॉम्प्लेक्स के नवीनतम शोध को सामने रखा गया है। DRDO स्वदेशी सेमीकंडक्टर तकनीक के अंतर्गत विकसित ये हाई-फ्रीक्वेंसी चिप्स आधुनिक ‘एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे’ (AESA) रडार की रीढ़ हैं, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के ड्रोन और स्टील्थ विमानों को ट्रैक कर सकते हैं। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने क्वांटम सेंसिंग और स्वदेशी फोटोनिक चिप्स के प्रोटोटाइप भी प्रदर्शित किए हैं, जो भविष्य के सुरक्षित सैन्य संचार की नींव रखेंगे।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन जटिल रक्षा चिप्स के स्वदेशी उत्पादन से न केवल आयात पर खर्च होने वाली भारी विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग को ग्लोबल सप्लाई चेन की रुकावटों से भी स्थायी आजादी मिलेगी। सम्मेलन में मौजूद रक्षा विशेषज्ञों और स्टार्टअप्स ने इन स्वदेशी चिप्स के व्यावसायिक और औद्योगिक उत्पादन में गहरी रुचि दिखाई है।

आत्मनिर्भर रक्षा चिप निर्माण से भारतीय सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा को कैसे मिलेगा लाभ?

आधुनिक युद्ध के मैदान में आत्मनिर्भर रक्षा चिप निर्माण किसी भी देश की संप्रभुता के लिए सबसे अहम शर्त बन चुका है। यदि किसी मिसाइल, संचार प्रणाली या रडार में विदेशी चिप लगी हो, तो उसमें गुप्त हार्डवेयर खामी (Backdoor या Kill Switch) होने का खतरा हमेशा बना रहता है। DRDO स्वदेशी सेमीकंडक्टर तकनीक के जरिए देश के भीतर ही चिप डिजाइन और फैब्रिकेशन होने से भारतीय सेना के हथियार प्रणालियों में जासूसी या साइबर छेड़छाड़ की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

इसके साथ ही यह पहल केंद्र सरकार के ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (ISM) को भी सीधी मजबूती प्रदान करती है। आने वाले समय में डीआरडीओ अपनी इस उन्नत चिप तकनीक को भारतीय निजी रक्षा कंपनियों और सेमीकंडक्टर फाउंड्रीज को हस्तांतरित करेगा, जिससे देश में ही रक्षा और अंतरिक्ष ग्रेड के प्रोसेसर का बड़े पैमाने पर निर्माण शुरू हो सकेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: DRDO स्वदेशी सेमीकंडक्टर तकनीक का प्रदर्शन कहां किया गया है?
उत्तर: नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव’ (ESTIC 2026) में डीआरडीओ ने अपनी स्वदेशी सेमीकंडक्टर और रक्षा चिप तकनीक का प्रदर्शन किया है।

प्रश्न 2: डीआरडीओ द्वारा तैयार किए गए गैलियम नाइट्राइड (GaN) चिप्स का क्या काम है?
उत्तर: ये हाई-पावर स्वदेशी चिप्स अत्यधिक तापमान और रेडिएशन को झेल सकते हैं, जिनका मुख्य उपयोग भारतीय सेना के आधुनिक AESA रडार, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम, फाइटर जेट्स और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरणों में किया जाता है।

स्रोत: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) एवं ESTIC 2026 की आधिकारिक जानकारी के आधार पर (BhaaratFeed न्यूज़ डेस्क)

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