कुवैत में बड़ा फैसला: रियायती (सब्सिडी वाले) डीजल की तस्करी मामले में कोर्ट ने सुनाया सख्त फैसला।
5 भारतीयों को सजा: मुख्य भारतीय आरोपी को 7 साल की जेल, जबकि 4 अन्य भारतीयों को 1 महीने की कैद।
तस्करी का बड़ा नेटवर्क: फर्जी दस्तावेजों के जरिए कुवैत से बाहर भेजा जा रहा था सरकारी सब्सिडी वाला डीजल।
कुवैत की एक आपराधिक अदालत (Criminal Court) ने सरकारी सब्सिडी वाले डीजल की अवैध तस्करी और बिक्री के मामले में 5 भारतीय नागरिकों समेत मुख्य आरोपियों को सख्त सजा सुनाई है। इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ करते हुए कोर्ट ने कुवैत नगरपालिका के एक कर्मचारी और एक भारतीय नागरिक—जो इस नेटवर्क के मुख्य सरगना थे—दोनों को 7-7 साल की कड़ी कैद की सजा दी है।
इसके अलावा, अदालत ने इस साजिश में शामिल 4 अन्य भारतीय नागरिकों को भी दोषी करार देते हुए 1-1 महीने की जेल की सजा सुनाई है। हालांकि, सबूतों के अभाव में एक कस्टम अधिकारी, गृह मंत्रालय के एक सार्जेंट और मिस्र (Egypt) के एक मार्केटिंग मैनेजर को बरी कर दिया गया।
क्या था पूरा मामला?
अदालत के अनुसार, यह गिरोह कुवैती सरकार द्वारा आम जनता को दिए जाने वाले सब्सिडी वाले डीजल को कौड़ियों के भाव खरीदता था। इसके बाद फर्जी कस्टम दस्तावेज (Custom Declarations) और एग्जिट परमिट तैयार करके इस डीजल को कंटेनरों में भरकर अवैध रूप से देश से बाहर ऊंची कीमतों पर बेचने के लिए भेज दिया जाता था।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने न केवल सरकारी कागजातों के साथ हेरफेर की, बल्कि बड़े पैमाने पर सीमा शुल्क की चोरी और ईंधन की तस्करी को अंजाम दिया। कुवैत प्रशासन ने इस फैसले के साथ साफ कर दिया है कि सरकारी संसाधनों की हेराफेरी और अवैध तस्करी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।