- हुगली के भद्रेश्वर स्थित श्रीमणि घाट पर बुधवार रात दुर्गा प्रतिमा का ढांचा निकालते समय बीजेपी नेत्री गौरी साहनी की मौत हो गई।
- गंगा नदी में भाटा होने के कारण वह नदी की गाद (कीचड़) में फंस गईं, जिसके बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।
- चंदननगर अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया; गुरुवार को चुंचुड़ा के इमामबाड़ा अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम कराया गया।
Full News Article: पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। भद्रेश्वर के श्रीमणि घाट पर बुधवार रात गंगा नदी से प्रतिमा का लकड़ी का ढांचा बाहर निकालते समय स्थानीय बीजेपी नेत्री गौरी साहनी की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। इस घटना के बाद से मृतका के परिवार और स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं में शोक की लहर है।
मिली जानकारी के मुताबिक, भद्रेश्वर नगरपालिका के वार्ड नंबर 16 की रहने वाली गौरी साहनी लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हुई थीं। बीजेपी के जिला उपाध्यक्ष गोपाल उपाध्याय ने उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि गौरी पार्टी की एक पुरानी और सक्रिय कार्यकर्ता थीं। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि दुख की इस घड़ी में पूरी पार्टी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।
गंगा की गाद में फंसने से बिगड़ी हालत
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बुधवार रात श्रीमणि घाट पर दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला चल रहा था। इसी दौरान गौरी साहनी विसर्जन घाट से करीब 100 मीटर दूर गंगा नदी में प्रतिमा का ढांचा निकालने के लिए उतरीं। उस वक्त नदी में भाटा (पानी का स्तर कम) होने की वजह से वह गंगा की गहरी गाद में फंस गईं और उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।
मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने हालात को भांपते हुए उन्हें तुरंत बाहर निकाला और चंदननगर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। गुरुवार को उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए चुंचुड़ा के इमामबाड़ा अस्पताल भेजा गया। डॉक्टरों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों का पता चल सकेगा।
क्यों अहम है यह खबर / मामले की पृष्ठभूमि
स्थानीय निवासी और बीजेपी नेता मदन प्रसाद साव ने बताया कि गौरी साहनी घाट के पास ही गंगा किनारे रहती थीं। वह पिछले काफी समय से दुर्गा प्रतिमाओं के ढांचे को इकट्ठा करने और उन्हें बेचने का काम करती थीं। मदन प्रसाद साव का दावा है कि गौरी पहले से ही बीमार चल रही थीं, लेकिन इसके बावजूद वह ढांचा निकालने के लिए नदी में उतर गईं और यह हादसा हो गया।
बता दें कि पश्चिम बंगाल में मूर्ति विसर्जन के तुरंत बाद कारीगरों और स्थानीय लोगों द्वारा नदी से बांस और लकड़ी के ढांचे निकालने की पुरानी परंपरा है, ताकि इनका दोबारा इस्तेमाल किया जा सके। हालांकि, रात के अंधेरे और नदी की फिसलन भरी गाद में सुरक्षा इंतजामों के बिना उतरना अक्सर जानलेवा साबित होता है। दुर्गा पूजा के ठीक बाद हुई इस घटना ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: हुगली के भद्रेश्वर में बीजेपी नेत्री गौरी साहनी की मौत कैसे हुई? उत्तर: बुधवार रात भद्रेश्वर के श्रीमणि घाट पर गंगा नदी से दुर्गा प्रतिमा का ढांचा निकालते समय वह नदी की गाद में फंस गईं और अचानक तबीयत बिगड़ने से उनकी मौत हो गई।
प्रश्न 2: गौरी साहनी कौन थीं और कहां रहती थीं? उत्तर: गौरी साहनी हुगली जिले के भद्रेश्वर नगरपालिका के वार्ड नंबर 16 की निवासी और बीजेपी की एक सक्रिय स्थानीय नेत्री थीं, जो प्रतिमाओं के ढांचे बेचने का काम भी करती थीं।